परवरिश ही ऐसी हुई है हमारी ना गरीब का मजाक उड़ाते हैं। और ना ही अमीर का तलवा चाटते हैं। हम सिर्फ इंसानियत को सम्मान करते हैं।
हमने सीखा है हर इंसान को इंसान समझना।
ना दौलत से किसी का इज्जत बढ़ती है ।
और ना ही गरीबी से किसी की औकात घटती है। क्योंकि कपड़े गाड़ियां और बंगले बस पहचान का हिस्सा होते हैं,असली पहचान इंसान के किरदार का होता है।
हमारी नजर में सब बराबर है,चाहे अमीर हो या गरीब।
हम रिश्ते दिल से निभाते हैं, हैसियत देखकर नहीं।
हमें सिखाया गया है कि जेब नहीं सोच बड़ी होनी चाहिए।
क्योंकि पैसों से सिर्फ सामान खरीदा जा सकता है इज्जत नहीं।